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khajuraho
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khajuraho temple overview

khajuraho जो की भारत के प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों में से एक हे। यहाँ सिर्फ एक मंदिर नहीं हे यहाँ पर कई मंदिरो का समूह हे। मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित यह मंदिर अपनी बेहत ही शानदार वास्तुकला और मूर्तिकला के लिए जगविख्यात हे।

khajuraho मध्य प्रदेश राज्य का एक प्रमुख शहर हे। khajuraho के नाम के पीछे एक बात मशहूर हे। और वो बात यह की आदिकाल में यहाँ पर बहुत ही सारे खजूर के वृक्ष थे इसीलिए इसका नाम खजुराहो पड़ा। यह शहर प्राचीनकाल में। ‘खजूरपुरा’ और ‘खजुरवाहिका’ के नाम से भी जाना जाता था।

जैसा की हमने बताया khajuraho नाम कोई एक मंदिर को समर्पित नहीं हे। यहाँ पर दजनो मंदिरो का समूह हे। और इसमें ज्यादातर हिन्दू मंदिर हे। और बाकि के जैन मंदिर हे। इस समूह में हिन्दू और जैन दोनों मंदिर मौजूद हे। मंदिरो के इस समूह को पूरा आकर में आने में लगभग 100 साल लगे थे।

khajuraho के इस मंदिर के समूह में कुल मिलाकर 85 मंदिर बने हुए तह लेकिन आक्रमणकारिओं और देखभाल के आभाव के कारण आज ये संख्या घाट कर 25 तक आ गई हे।

इस मंदिर के समूह को बनवाने का प्रारंभिक काम चंदेल वंश के स्थापक चन्द्रवर्मन ने 950-1050 ई में किया था। khajuraho अपने प्राचीन मंदिर और उसकी बहेतरीन कलाकृति के लिए सुप्रसिद्ध हे। यह मंदिर की मुर्तिया आध्यात्मिक शिक्षा,रिश्तेदारी,कुश्ती,रॉयल्टी और सबसे विशेष जिसके लिए यह प्रशिद्ध हे कामुक कलाओ को दर्शाती हे।

इस मंदिरो की इसी आकर्षित और अद्भुत कलाकृतिओ के लिए यूनेस्को ने इसे भारत में विश्व धरोहल घोसित किया हे।

khajuraho mandir के समूह को तीन विभागों में बाटा गया हे : पूर्वीय,पश्चिमी और दक्षिणी। खजुराहो के पूर्वीय समूह में चंदेला शासन के दौरान फलते-फूलते जैन धर्म के लिए मंदिरो का निर्माण किया गया था। जहा पर जैन समुदाय के कई पौराणिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मंदिर मौजूद हे।

khajuraho के मंदिरो के समूह में पश्चिमी और दक्षिणी भाग में विभिन्न हिन्दू देवी देवता को समर्पित कई ऐतिहासिक मंदिर हे। यह पर कई प्रसिद्ध मंदिर हे जिसमे से छह मंदिर भगवान शिव को समर्पित हे, एक भगवान गणेश और सूर्य देव को जबकि तीन जैन तीर्थकर मंदिर हे। कंदरिया महादेव मंदिर सबसे बड़ा मंदिर हे।

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खजुराहो का इतिहास – khajuraho history

khajuraho का यह ऐतिहासिक मंदिर का इतिहास लगभग एक हजार साल पुराना मिलता हे। भारत वर्ष में गुप्त काल के शासन दरमियान खजुराहो में वास्तुकला और मंदिरो का निर्माण शुरू हुआ।

चंदेल साम्राज्य के स्थापक चन्द्रवर्मन मध्यकाल में बुंदेलखंड के राजपूत शासक थे राजा चन्द्रवर्मन अपने आप को चंद्रवंशी राजपूत मानते थे।

khajuraho के मंदिर का निर्माण 950 ईस्वी से 1050 ईस्वी के बिच में तक़रीबन सो सालो तक चला। कहा जाता हे की चंदेल साम्राज्य के प्रत्येक राज ने यहाँ पर कम से कम एक मंदिर का तो निर्माण करवाया ही था। यहाँ पर मंदिरो के निर्माण के साथ ही चंदेला साम्राज्य के शासक ने अपने साम्राज्य की राजधानी खजुराहो से महोबा स्थानांतरित कर दी थी।

khajuraho के इस विश्व धरोहल मंदिर के बारे में कई इतिहासकारो का कहना हे के यहाँ पर हिन्दू और जैन समुदाय के मंदिरो को मिलकर कुल 85 मंदिर मौजूद थे। इन 85 मंदिरो का समूह को 20 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ था। लेकिन इसके कई मंदिर आक्रमणकारिओं द्वार और इसकी कामुक मुर्तिओ के लिए इसे तोड़ दिया। आज यहाँ पर 85 में से सिर्फ 25 मंदिर ही बचे हे और वह 20 किलोमीटर के क्षेत्र से घाट कर 6 किलोमीटर में आ गए हे।

अपनी अद्भुत कारीगरी और आकर्षक मूर्तिकला की वजह से khajuraho को साल 1986 में विश्व धरोहर की लिस्ट में शामिल किया गया था।

खजुराहों के मंदिर के निर्माण से जुड़ी कथा

khajuraho के निर्माण से जुडी एक कथा बहुत मशहूर हे। कहा जाता हे के भारत वर्ष में कशी के एक प्रसिद्ध और तेजस्वी ब्राह्मण की एक बेहत ही खूबसूरत पुत्री थी जिसका नाम हेमवती था। हेमवती एक दिन नदी में स्नान कर ने गई थी। स्नान करते समय हेमवती पर चंद्रदेव की नजर पड़ी। हेमवती को देखकर चंद्रदेव उन पर मोहित हो गए। उनके मन में हेमवती को पाने की इच्छा होने लगी तो उन्हों ने अपना वेश बदल कर हेमवती का अपहरण कर लिया। फिर दोनों को एक दूसरे को प्रेम हो गया। हेमवती और चंद्रदेव को एक बेटा हुआ जिसका नाम चन्द्रवर्मन रखा। चन्द्रवर्मन ने ही आगे जाके चंदेल वंश की नीव रखी थी।

हेमवती ने चन्द्रवर्मन का पालन-पोषण जंगलो में किया था। चंद्रदेव ने हेमवती को कहा था की उसका पुत्र बड़ा होकर महान साम्राज्य की स्थापना करेगा और भव्य मंदिरो का निर्माण करवाएगा।

हेमावती की इच्छा थी की उसका बीटा बड़ा होकर साहसी और तेजस्वी बने। अपनी माता की इच्छा अनुसार चन्द्रवर्मन एक साहसी और तेजस्वी राजा बना जिसने जिसने मध्यप्रदेश के छतरपुर के पास स्थित khajuraho में अपने साम्राज्य की और बेहद खूबसूरत और भव्य खजुराहो के मदिर की स्थापना की।

खजुराहो में प्रसिद्ध मंदिर

लक्ष्मण मंदिर

लक्ष्मण मंदिर खजुराहो मंदिर समूह में दूसरे स्थान में आता हे। इस मंदिर का निर्माण 930-950 ईसवी के मध्य में किया गया था। यह मंदिर भी अपनी कारीगिरी के लिए बहुत ही प्रसिद्ध हे। यह मंदिर खास तोर पर भगवन विष्णु को समर्पित हे। इस मंदिर की दीवारों पे हिन्दू देवताओ और जानवरो की मुर्तिआ बनाई गई हे। इस मंदिर की हर एक मूर्ति बेहद ही आकर्षक और मनमोहक हे।

चित्रगुप्त मंदिर

चित्रगुप्त मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में हुआ था। यह मंदिर मुख्य रूप से सूर्यदेव को समर्पित किया गया हे। यह मंदिर भी खजुराहो के मंदिर समूह में से एक पुराना मंदिर हे। इस मंदिर के अंदर आपको भगवान विष्णु का ग्यारह सर वाला रूप भी देखने को मिलेगा। इस मंदिर में मुख्य रूप से सात घोड़े वाले रथ पर खड़े सूर्यदेव की मूर्ति बेहद ही आकर्षक हे। इस मंदिर की दीवार पर भी देवी-देवताओ,स्त्रीओ और बहुत सारी और सुन्दर पत्थर की बारीक़ नक्काशी की हुई हे।

चतुर्भुज मंदिर

यह मंदिर खजुराहो के दक्षिणी भाग में बनाया गया था। इस मंदिर का निर्माण 1100 ईसवी में किया गया था। इस मंदिर के प्रवेशद्वार में हिन्दू धर्म के तीन बड़े भगवान ब्रह्मा,विष्णु और महेश के चित्रों की बहुत ही शानदार नक्कासी बनाई गई हे। इस मंदिर में खास देखने लायक चीज भगवान विष्णु की चार भुजा वाली 9 फिट ऊँची प्रतिमा हे। इस मंदिर में नरसिंह भगवन और शिव के अर्धनारीश्वर रूप की दुर्लभ मूर्तिए भी उपलब्ध हे।

कंदरिया महादेव मंदिर

कंदरिया महादेव मंदिर खजुराहो समूह का सबसे विशाल मंदिर हे। यह मंदिर बहुत ही शानदार और अदभुत मंदिर हे। यह मंदिर भगवान शिव को शमर्पित हे। यह एक शिव मंदिर के रूप में देखा जाता हे। यह मंदिर शिव भक्तो के लिए महत्वपूर्ण स्थान हे। इसका निर्माण ईसवी 999 में किया गया था। इस मंदिर का नाम भगवान शिव का एक नाम कंदर्पी के नाम से रखा गया हे।

मंतगेश्वर मंदिर

मंतगेश्वर मंदिर खजुराहो समूह का सबसे प्राचीन मंदिर हे। निर्माण आज से लगभग 1100 साल पहले किया गया था यानि 920 ईस्वी में इस मंदिर का निर्माण राजा हर्षवर्मन ने करवाया था 2.5 मीटर का एक शिवलिंग मौजूद हे।

अन्य मंदिर

  • चौंसठ योगिनी मंदिर :
  • जगदम्बा मंदिर :
  • नंदी मंदिर
  • पार्वती मंदिर :
  • सूर्य मंदिर
  • विश्वनाथ मंदिर

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