Sat. Jan 22nd, 2022
jaisalmer fort
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राजस्थान अपने शानदार किले और बेजोड़ राजठाठ के लिये पुरे विश्व मे प्रसिद्ध है. दुनिया भरसे लोग राजस्थान के इन अनोखे और सुंदर स्थालो को देखने आते है. राजस्थान मे कई ऐसी जगह है जहा हर साल पर्यटको की भीड़ लगी रहती है, और यह सभी जगहे विदेशी पर्यटको सबसे ज्यादा अपनी और आकर्षित करता है. इनही मे से एक जैसलमेर का किला है जो हर साल हजारों सैलानी को अपनी और आकर्षित करता है.

जैसलमेर का किला राजस्थान मे देखने लायक सबसे बहेतरीन जगहों मे से एक है. यह किला अपने समय मे भी उतना ही महत्वपूर्ण था जैसा ये आज है.जैसलमेर किला राजस्थान का महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल है. यह किला राजस्थान का ही नहीं पुरे भारत का एक महत्वपूर्ण किला है.

राजस्थान का यह किला स्थानीय लोगो मे सोनार का किला नाम से भी प्रसिद्ध है. सुबह जब सूरज की किरणे इस किले पर पडती है तो यह किला सोने की तरह चमकता है इसी लिये इस किले को सोनार किला या Golden Fort कहते है. राजस्थान का यह किला दुनिया के कुछ सबसे बड़े किलो मे से एक किला है. इस किले को रेगिस्तान दुर्ग भी कहा जाता है क्युकी यह थार रेगिस्तान के बिच मे बना है.

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जैसलमेर किला जिसे स्थानीय रूप से सोनार किला के नाम से जाना जाता है. यह किला भारत के राजस्थान में जैसलमेर शहर में स्थित है जो दुनिया के सबसे बड़े किलों में से एक है। इसका निर्माण 1156 ईस्वी में भाटी राजपूत नेता राव जैसल द्वारा किया गया था. उन्ही के नाम से इस किले का नाम रखा गया है ।

यह किला यहां के लोगों द्वारा ‘सोने का किला (स्वर्ण किला)’ के रूप में जाना जाता है और जैसलमेर शहर में सबसे प्रसिद्ध स्थालो में से एक है। थार रेगिस्तान की अंतहीन सुनहरी रेत के बीच गर्व से खड़ा यह किला जैसलमेर का सबसे लोकप्रिय पर्यटक स्थल है।

जैसलमेर के किले का निर्माण भाटी राजपूत द्वारा करवाया गया था. भाटी राजपूत पंजाब के सियालकोट इलाके के थे, जिन्होंने जैसलमेर से 120 किमी दूर एनोट नामक शहर में खुद को स्थापित किया। देवराज नाम के वंशजों में से एक ने लोद्रा राजपूत के निरपभरु को हराया और लोद्रुवा को अपनी राजधानी बनाया और खुद को महारावल कहा।

महारावल जैसल देवराज के वंशज थे और उन्होंने 1156 में जैसलमेर किले का निर्माण भी किया था जो कि एक विशाल किला है। उस वर्ष उन्होंने गौर के सुल्तान की मदद से अपने भतीजे भोजदेव को गद्दी से उतार दिया।

किले को दिल्ली के सुल्तान से बचाने के लिए राजा जेत्सी ने भी 1276 में किले को मजबूत किया था। लेकिन फिर भी सुल्तान आठ साल की घेराबंदी करके किले को हासिल करने में सफल रहा। भाटियों ने फिर से किले पर कब्जा कर लिया लेकिन इसकी मरम्मत नहीं कर पाए। 1306 में डोडू ने किले को मजबूत किया।

13वीं शताब्दी में किले पर कब्जा करने के बाद अलाउद्दीन खिलजी ने 9 साल तक जैसलमेर पर शासन किया। इस किले को जितने के लिये 8 साल की घेराबंदी की गई थी इस घेराबंदी के दौरान जैसलमेर की कई महिलाओं ने जौहर कर लिया था ।

इसके बाद मुगल सम्राट हुमायूं ने 1541 में किले पर हमला किया। लगातार हमलों के परिणामस्वरूप, जैसलमेर के राजा ने 1570 में अकबर के साथ संधि पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने अकबर को अपनी बेटी की शादी की पेशकश भी की थी । मुगलों ने 1762 तक किले को नियंत्रित किया।

महारावल मूलराज ने 1762 में मुगलों को हरा कर किले पर वापिस कब्जा कर लिया। उन्होंने 1818 में ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ एक संधि पर भी हस्ताक्षर किए। मूलराज का 1820 में निधन हो गया और उनके पोते गज सिंह ने उन्हें समृद्ध किया। ब्रिटिश काल के दौरान यहाँ से गुजर रहे पेशे का मुख्य रास्ता बदल दिया। उन्होंने बंबई के बंदरगाह से व्यापार शुरू किया जिसके कारण सिल्क रोड से व्यापार में गिरावट आई और स्वतंत्रता के बाद बंद हो गया।

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जैसलमेर का किला १,५०० फीट (४६० मीटर) लंबा और ७५० फीट (२३० मीटर) चौड़ा है और एक पहाड़ी पर बनाया गया है जो आसपास के ग्रामीण इलाकों से २५० फीट (७६ मीटर) की ऊंचाई से ऊपर उठता है। किले के तहखाने में एक १५ फीट (४.६ मीटर) लंबी दीवार है जो रक्षा की दोहरी रेखा बनाती है।

किले के बुर्ज लगभग 30 फीट (9.1 मीटर) की एक श्रृंखला बनाते हैं। किले के नीचे की ओर चार प्रवेश द्वार हैं, जिनमें से एक पर तोपों से पहरा हुआ करता था। किले की दीवारों के शिखर पर एक व्यक्तिगत उपकरण फहराया गया है, और इसका उपयोग मौसम का अनुमान लगाने के लिए किया जाता था। इस किले मे इस्लामी और राजपूत स्थापत्य शैली का नाजुक मिश्रण आपको देखने को मिलेगा.

जैसलमेर का किला अला-उद्दीन-खिलजी और मुगल सम्राट हुमायूं जैसे बड़े बड़े मुस्लिम शासकों के कई हमलों से बच गया। किले के परिसर के अंदर पर्यटक कई स्थापत्य इमारतों को देख सकते हैं जिनमें महल, घर और मंदिर शामिल हैं जो नरम पीले बलुआ पत्थर से बने हैं, इसे देखकर ऐसा लगता है कि मानो किला सोने से बना हो और इसकी सुंदरता सूर्यास्त के साथ बढ़ती है जब यह सोने की तरह चमकता है।

जैसलमेर किले में संकरे घुमावदार रास्ते हैं जो किले के कई हिस्सों को आपस में जोड़ते हैं। जैसलमेर किले का परिसर इतना विस्तृत है कि शहर की लगभग एक चौथाई आबादी इसी किले में स्थित है।

जैसलमेर घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से मार्च का महीना है। इन महीनों में काफ़ी अच्छा वातावरण होता है लेकिन दिसंबर के साथ-साथ जनवरी का महीना भी वास्तव में शांत होता हैं। अप्रैल से अगस्त तक के समय में यहाँ बहुत गर्मी होती है और सितंबर ओर अक्टूबर में यहाँ थोड़ा भेज वाला वातावरण होता है । हालांकि जैसलमेर में बहुत कम बारिश होती है लेकिन इससे नमी बनी रहती है।

  • यह किला राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा किला है जोकि एक पहाड़ी की चोटी पर 250 मीटर की ऊचाई पर बनाया गया है.
  • अपने ऐतिहासिक महत्व और अपनी अदभुत वस्तुकला के कारण यह किला UNESCO की विश्व धरोहल स्थल की सूची मे भी शामेल किया गया है.
  • इस किले को तीन मजबूत परत के साथ बनाया गया है. जिसमे से बाहर की दीवाल को पूरी तरह से पत्थर से बनाई गई है. जिससे की दुश्मनों से पूरी तरह से सुरक्षा मिल सके.
  • इस किले मे कुल मिलाकर 99 गढ़ बने हुए हुए है जिनमे से 93 गढ़ 1633 से 1647 के बिच मे बनाए गए है.
  • अलाउद्दीन खिलजी ने इस किले पर आठ साल तक शाशन किया था और अपने कब्जे मे रखा था.

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