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jama masjid delhi

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Jama Masjid -: भारत दुनिया में तीसरा सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश हे। और हिन्दू धर्म के बाद मुस्लिम धर्म ही भारत में दूसरे नंबर का सबसे बड़ा मजहब हे। भले ही भारत दुनिया में तीसरे नंबर की मुस्लिम आबादी रखता हो लेकिन मस्जिदों के मामले में भारत दुनिया में नंबर एक पर। अन्य किसी भी मुस्लिम मुल्क से ज्यादा आपको भारत में मस्जिदे देखने को मिलेगी। आज हम बात करे गए jama masjid की और जाने गए जामा मस्जिद के बारे में के कैसे उसका निर्माण हुआ और पूरा इतिहास।

भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक jama masjid पुरानी दिल्ली में स्थित है। इसका निर्माण 1644 में शुरू हुआ था और मुगल बादशाह शाहजहां ने इसे पूरा किया था। इसका निर्माण लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से किया गया हे। इस प्राचीन और भव्य मस्जिद को मस्जिद-ए-जहाँनुमा भी कहा जाता है जिसका अर्थ है दुनिया को देखने वाली मस्जिद।

मस्जिद का प्रांगण लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है और उत्तर, दक्षिण और पूर्व से सीढ़ियों बनाई हे जिससे मस्जिद में दाखिल हो सके। यह मस्जिद इतनी विशाल है कि इसमें एक समय में 25,000 नमाज़ी आसानी से अपनी प्रार्थना कर सकते हैं। जामा मस्जिद 10 मीटर की ऊंचाई पर बनाई गई है और इसमें तीन द्वार हे। यहा 40 मीटर ऊंची चार मीनारें हैं। मीनारों से पुरानी दिल्ली की हलचल भरी सड़कों का शानदार नजारा देखा जा सकता है।

जामा मस्जिद मुगल वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। दिल्ली की जमा मस्जिद का काम 1650 में मुग़ल सुल्तान शाहजहाँ ने बनवाया था। इसे बनाने में 6 साल लगे थे यह मस्जिद 1556 में बनकर तैयार हुई थी। जमा मस्जिद का उद्घाटन इमाम सैयद गफूर शाह बुखारी ने किया था जोकि हाल के उज्बेकिस्तान के रहने वाले थे।

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जामा मस्जिद का इतिहास – Jama masjid delhi history

मुगल सम्राट अकबर के पोते और सलीम के बेटे शाहजहाँ ने साल 1644 से 1656 के बिच जामा मस्जिद का निर्माण करवाया था। इस मस्जिद को पूरी तरह बनने में करीब बारह साल लगे और इस बनाने में तक़रीबन 5000 करीगरोने अपना पसीना बहाया था। असल में मुग़ल काल के दौरान इस मस्जिद-ए-जहाँ-नुमा कहा जाता था। जिसका मतलब होता हे पूरी दुनिया को देखने वाली मस्जिद। इस मस्जिद के निर्माण के समय इस की देखभाल का काम शाहजहाँ के शाशन में वजीर रह चुके सादुल्ला खान को दिया गया था।

जामा मस्जिद को बने हुए अभी करीब 365 साल हो गए। उस समय इस मस्जिद के निर्माण का खर्च एक मिलियन यानि 10 लाख रूपए हुआ था। दिल्ली में ताज महल और लाल किले का निर्माण भी शाहजहाँ ने करवाया था ये दोनों जगह जमा मस्जिद के विपरीत दिशा में बनाई गई हे।

जब मस्जिद के निर्माण का कार्य पूर्ण हुआ तो इस मस्जिद का इमाम किसे बनाए इसकी तलाश शुरू हो गई। जमा मस्जिद के इमाम की तलाश बुखारा (आज का उज्बेकिस्तान ) में जाकर ख़त्म हुई। उज्बेकिस्तान के छोटे शहर बुखारा के सैय्यद अब्दुल गफूर शाह को जमा मस्जिद का इमाम बनाया गया। इमाम साहब,शाहजहाँ और इनके दरबारिओ ने पहलीबार दिल्ली की आवाम के साथ 14 जुलाई 1656 में जामा मस्जिद में नमाज़ पढ़ी।

जामा मस्जिद को दिल्ली की शान भी कहा जाता हे। इसके बारे में कहा जाता हे की अगर आप दिल्ली घूमने गए हो और जामा मस्जिद नहीं गए तो आपका दिल्ली का सफर अधूरा हे। दिल्ली की शान इस मस्जिद ने कई उतार-चढाव भी देखे हे।

जब 1857 में भारतीय अंग्रेजो लड़ाई हुई तब अंग्रेजो की जित हुई तो अंग्रेजो ने जामा मस्जिद पर कब्ज़ा कर लिया और वहा पर अपने सैनिको को बैठा कर नाकाबंदी कर दी। कई इतिहासकार का कहना हे की अंग्रेज भारतीओ को सबक सिखाने के लिए जामा मस्जिद को तोडना चाहते थे। लेकिन दिल्लीवासी के प्रचंड विरोध के कारण अंग्रेजो को इनके सामने झुकना पड़ा और मस्जिद को कोई नुकशान नहीं हुआ।

जैसे जैसे समय बीतता गया इस मस्जिद का बांधकाम कमजोर होता गया। और समय समय पर इसकी मरम्मत भी की गई। ऐसे ही जब 1948 में इस मस्जिद को मरम्मत की जरुरत पड़ी तब हैदराबाद के आखरी निजाम असफ जाह 7 के पास से मस्जिद के एक चोथाई हिस्से की मरम्मत के लिए 75 हजार रूपए का दान माँगा गया था। लेकिन निजाम ने 75 हजार की बजाय पुरे 3 लाख का दान किया और कहा मस्जिद का एक भी हिस्सा पुराना नहीं दिखना चाहिए।

आज दिल्ली की ही नहीं पुरे भारत की शान हे। इस मस्जिद के मीनारों और दीवारों पर मुगलिया नक्काशी इतनी बारीक़ और सुन्दर हे की उसके ऊपर से नजर ही नही हटती। इस मस्जिद में कुल चार दरवाजे हे जो इसकी शान को और भी ज्यादा बढ़ा देते हे।

जामा मस्जिद वास्तुकला – Jama Masjid Architecture

वैसे तो दिल्ली में देखने लायक कई स्थल मौजूद हे लेकिन पुरानी दिल्ली में बानी यह मस्जिद मुग़ल सम्राट शाहजहाँ के अदभुत वासवास्तुकला का उत्कृस्ट नमूना हे। इस मस्जिद की लम्बाई 65 मीटर और चौड़ाई 35 मीटर हे। और इस मस्जिद का आंगन 100 वर्ग मीटर का हे जो अपने अंदर 25000 लोगो को समां सकता हे।

12 साल में बनकर तैयार हुई यह मस्जिद मुस्लिमो के धार्मिक श्रद्धा का एक विशिष्ट स्मारक हे। इस मस्जिद के विशाल और सुन्दर आंगन में एक साथ हजारो लोग अपने रब के सामने माथा झुकाते हे। यह विशाल और भव्य मस्जिद दिल्ली के एक और प्रसिद्ध स्थान लाल किले से 500 मीटर की ही दुरी पर स्थित हे। इस मस्जिद को बनने में एक दशक से भी ज्यादा समय लगा और 5000 से भी ज्यादा लोगो ने मिलकर इसे बनाया था।

Quick View

  • जामा मस्जिद भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक हे।
  • इस मस्जिद का निर्माण सफ़ेद संगेमरमर और लाल सैंड स्टोन की पट्टीओ पर किया हे।
  • जामा मस्जिद की वास्तुकला में हिन्दू और मुस्लिम दोनों वास्तुकला के तत्व सामेल हे
  • इस मस्जिद का पूर्वीय प्रवेशद्वार बादशाहो द्वारा उपयोग किया जाता था। जो बाकि दिनों में बंद रहता था।
  • इस के मुख्य प्रार्थना खंड में ऊँचे मेहराब सजाए गए हे जो 260 खम्भों पर टिके हुए हे और इनके साथ 15 संगेमरमर की गुम्बद ऊंचाई पर लगाई गई हे।
  • मस्जिद का आंगन इतना बड़ा हे की एक साथ 25 हजार लोग नमाज़ अदा कर सकते हे।

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